मेरे अलफ़ाज़/कवितासाहित्य

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026: साहित्य, संवाद और कविता का संगम

अनामिका-अनुराधा शर्मा पुजारी सहित कवियों ने रचनात्मक अनुभव साझा किए

👆भाषा ऊपर से चेंज करें

नई दिल्ली, 10 जनवरी 2026।
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के अवसर पर साहित्य अकादेमी द्वारा दो महत्वपूर्ण साहित्यिक कार्यक्रम — ‘आमने-सामने’ और ‘कविता-पाठ’ — का आयोजन हॉल संख्या-2 स्थित ‘लेखक मंच’ पर किया गया। इन कार्यक्रमों में हिंदी और असमिया साहित्य की प्रतिष्ठित रचनाकारों तथा समकालीन कवियों ने अपनी रचनात्मक यात्रा और साहित्यिक दृष्टि से श्रोताओं को रू-बरू कराया।

‘आमने-सामने’ कार्यक्रम में रचना-प्रक्रिया पर संवाद

‘आमने-सामने’ कार्यक्रम में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित लेखिकाएँ अनामिका (हिंदी) और अनुराधा शर्मा पुजारी (असमिया) ने पाठकों के साथ अपनी रचना-प्रक्रिया साझा की और अपनी रचनाओं का पाठ भी किया।

अनामिका ने कहा कि अपने बारे में बोलना हमेशा सहज नहीं होता, विशेषकर एक क़स्बे से आने वाली स्त्री के लिए। उन्होंने कविता और स्त्री-स्वभाव के बीच समानता रेखांकित करते हुए कहा कि कविता इशारों में संवाद करती है, ठीक वैसे ही जैसे स्त्री का जीवन-शिल्प। उन्होंने 1971 के युद्ध के दौरान हुए ‘ब्लैक-आउट’ को अपने लेखन का पहला दृश्य-बिंब बताया और कहा कि साहित्य का दायित्व घनघोर अंधकार में भी प्रकाश फैलाना है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कविता ‘कमरधनिया’ का पाठ किया, जो गाँव की सामूहिक श्रमशील स्त्रियों पर आधारित है।

अनुराधा शर्मा पुजारी ने अपनी लेखकीय यात्रा को साझा करते हुए कहा कि वे अनायास ही लेखन की ओर आईं। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान लेखन की शुरुआत हुई। उनके लेखन में दुख, करुणा और हाशिये पर खड़े समाज की आवाज़ प्रमुख है। उन्होंने बताया कि जीवन में अकेलेपन और प्रकृति से निकटता ने उनकी रचनाओं को गहराई दी है। इस अवसर पर उन्होंने अपने आत्मकथात्मक संस्मरणों का पाठ भी किया।

‘कविता-पाठ’ कार्यक्रम में विविध विषयों की कविताएँ

कविता-पाठ कार्यक्रम में रश्मि भारद्वाज, हेमंत कुकरेती, रमेश प्रजापति और मनोहर बाथम ने अपनी कविताएँ प्रस्तुत कीं।

रश्मि भारद्वाज ने स्त्री विमर्श पर आधारित कविता ‘लाल’ के साथ-साथ ‘विसर्जन’‘भूख’ और ‘वो भी दिल की तरह टबकता है’ का पाठ किया।

हेमंत कुकरेती ने मानवीय संबंधों में बढ़ती वैमनस्यता पर आधारित कविता ‘दीवारें’ प्रस्तुत की और ‘बोलते थे सब’ व ‘जन्म न मृत्यु’ कविताएँ सुनाईं।

रमेश प्रजापति ने ‘पानी का वैभव’‘युद्ध’‘मकई की हँसी’‘पानी’‘दुख’ और ‘रात की टहनी पर ठहरी उम्मीद’ जैसी कविताएँ प्रस्तुत कीं।

मनोहर बाथम ने मानव तस्करी जैसे गंभीर विषय पर आधारित दो अप्रकाशित और दो प्रकाशित कविताएँ प्रस्तुत कर श्रोताओं को गहरे भावलोक में पहुँचाया।

अतिथियों का स्वागत और संचालन

कार्यक्रम के आरंभ में प्रख्यात कवि-चित्रकार लीलाधर मंडलोई ने सभी कवियों का अंगवस्त्र से सम्मान किया। साहित्य अकादेमी के संपादक (हिंदी) अनुपम तिवारी ने कार्यक्रम का कुशल संचालन करते हुए अतिथियों का परिचय श्रोताओं से कराया।

आगामी कार्यक्रम

कल ‘आमने-सामने’ कार्यक्रम में साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता बोडो लेखिका रश्मि चौधरी और डोगरी लेखक मोहन सिंह भाग लेंगे। वहीं नासिरा शर्मा की अध्यक्षता में हरिसुमन विष्ट और अवधेश श्रीवास्तव द्वारा कहानी-पाठ किया जाएगा।

और अधिक खबरें पढ़ने के लिए यहां Click करें
आप चाहें तो अपने मोबाइल पर Play Store से हमारा DAINIK INDIA 24X7 ऐप्प डाउनलोड कर सकते हैं।
🌟 Stay Updated with Dainik India 24×7!

Get the latest news on politics, entertainment, sports, and more right at your fingertips!

👉 Follow us for real-time updates:

Join our community and stay informed!
Tags

Related Articles

Back to top button
Close