76th Independence Day:आत्मनिर्भर भारत का आह्वान, नारी का अपमान बंद हो– PM मोदी
मोदी ने ग्रीन खेती तथा ग्रीन जॉब का भी जिक्र किया और कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में हम जल्द ही आत्मनिर्भर हो जाएंगे।

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लाल किले के प्राचीर से आजादी के अमृतमहोत्सव के मौके पर देशवासियों को संबोधित करते हुए “आत्मनिर्भर भारत “बनाने और नारी का अपमान बंद करने का आह्वान किया है और नागरिकों से देश के विकास के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करने का भी अनुरोध किया ताकि 2047 में हम एक विकसित राष्ट्र बन सकें।
प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी ने आज सुबह पारंपरिक पगड़ी और सफेद कुर्ते पजामे में बड़े उत्साह और उल्लास के साथ 9वीं बार देशवासियों को जब संबोधित किया तो पहली बार ‘मेड इन इंडिया” के 21 तोपों से सलामी दी गई। अपने भाषण में भारत में बने इन तोपों के लिए भारतीय सेना को भी बधाई दी और उनके त्याग एवं बलिदान का जिक्र किया।
उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज़ में जोशीला भाषण देते हुए देशवासियों से कहा कि आज हम आजादी का 75 वां महोत्सव बना रहे हैं और हमारा तिरंगा आन बान शान से विश्व के हर कोने में लहरा रहा है। इस अवसर पर हम आजादी की लड़ाई में भाग लेने वाले उन तमाम महापुरुषों को भी याद कर रहे हैं। इस संदर्भ में उन्होंने बिरसा मुंडा से लेकर महर्षि अरविंद पंडित जवाहरलाल नेहरू सुभाष चंद्र बोस, अंबेडकर और वीर सावरकर का भी जिक्र किया। उन्होंने अपने संबोधन में आदिवासी महापुरुषों का विशेष रुप से जिक्र किया जिनमें बिरसा मुंडा के सलवा गोविंद गुरु और अल्लारी सीताराम राजू जैसे भूले बिसरे नायक भी शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने महर्षि अरविंद को उनकी जयंती पर याद करते हुए “स्वदेशी से स्वराज और स्वराज से सुराज” के नारे का भी उल्लेख करते हुए कहा कि आज हमें “आत्म निर्भर “भारत बनने की जरूरत है। उन्होंने आत्मनिर्भर बनने के लिए सेना से 300 वस्तुओं का आयात न करने की भी अपील की और इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि आज भारत के 5 से 7 वर्ष के बच्चे भी विदेशी खिलौने से न खेलने का संकल्प ले रहे हैं। गुलामी की मानसिकता से ऊपर उठकर लोगों को काम करने का आह्वान किया और कहां कि भाषा हमारे लिए बंधन का काम करती है लेकिन हमें हर भाषा पर गर्व करना चाहिए और गुलामी की मानसिकता से ऊपर उठना चाहिए। उन्होंने देश के विकास में स्त्रियों की भागीदारी का जिक्र करते हुए कहां कि हमें अपने व्यवहार और संस्कार में तथा रोजमर्रा के जीवन और भाषा में भी बदलाव करना चाहिए ताकि नारी का अपमान न हो और नारी का गौरव राष्ट्र के विकास में सहायक हो सकता है। देश के विकास के लिए एकजुट भारत पर बल देते हुए कहा कि हमें ऐसा देश बनाने की जरूरत है जिसकी तरफ दुनिया देखे और वह अपनी समस्याओं का समाधान हमसे पाए। उन्होंने इस संबंध में “जनकल्याण से जग कल्याण” की भी बात कही।
प्रधानमंत्री ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और प्राचीन विरासत पर गर्व करने की बात कही और बताया कि हम लोग नर में नारायण, नारी में नारायणी , पौधे में परमात्मा, कंकर में शंकर देखते हैं और नदी को मां मानते हैं। मोदी ने ग्रीन खेती तथा ग्रीन जॉब का भी जिक्र किया और कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में हम जल्द ही आत्मनिर्भर हो जाएंगे।





