ओशो धाम में सजी ‘The Divine Within’ प्रदर्शनी, सात चित्रों में दिखी आंतरिक यात्रा
26 सितंबर से 26 अक्टूबर तक खुली रहेगी प्रदर्शनी, कला के माध्यम से दर्शकों को अपने भीतर झांकने का संदेश

👆भाषा ऊपर से चेंज करें
ओशो धाम, दिल्ली में कलाकार मा देव अनंती (अलका सिंह) की चित्र प्रदर्शनी ‘The Divine Within’ का शुभारंभ किया गया। यह प्रदर्शनी 25 से 27 सितंबर 2026 तक आयोजित ओशो नियो संन्यास सेलिब्रेशन का हिस्सा है। प्रदर्शनी का उद्घाटन मा धर्म ज्योति और स्वामी चैतन्य कीर्ति ने ओशो धाम, झटिकरा रोड, नजफगढ़ के पास किया।
प्रदर्शनी में ऑयल और एक्रेलिक माध्यम से तैयार सात चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। इन कलाकृतियों के माध्यम से कलाकार ने अपनी आंतरिक यात्रा को अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। चित्रों में बाहरी दुनिया की खोज से लेकर अपने भीतर मौजूद मौन, साक्षीभाव, प्रेम और जागरूकता के अनुभवों को रंगों और आकृतियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
ध्यान से जुड़ी चित्रकला बनी अभिव्यक्ति का माध्यम
मा देव अनंती के लिए चित्रकला केवल कलात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि ध्यान का विस्तार बन गई है। उनके अनुसार, ध्यान के दौरान महसूस होने वाले मौन और आंतरिक उपस्थिति को शब्दों के बजाय रंगों और आकृतियों के माध्यम से व्यक्त किया जा सकता है।
यह प्रदर्शनी दर्शकों को भी कुछ क्षण ठहरकर अपने भीतर देखने और रचनात्मकता तथा ध्यान के बीच के संबंध को महसूस करने का अवसर देती है।
‘The Divine Within’ प्रदर्शनी 26 सितंबर से 26 अक्टूबर 2026 तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी और इसमें सभी लोग शामिल हो सकते हैं।
1982 में शुरू हुआ ओशो से जुड़ाव
मा देव अनंती का ओशो से जुड़ाव वर्ष 1982 में शुरू हुआ, जब उन्होंने ओशो को सुनना प्रारंभ किया। धीरे-धीरे उनके विचारों और शब्दों की गहराई को महसूस करने के साथ उनकी आंतरिक यात्रा आगे बढ़ती गई।
उन्होंने पारिवारिक जीवन, विवाह, बच्चों और विभिन्न जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपनी आध्यात्मिक यात्रा जारी रखी। वर्ष 2011 में ओशो धाम की पहली यात्रा उनके जीवन में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई। इसके बाद ध्यान धीरे-धीरे उनके दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया।
उनके अनुसार, जागरूकता ने जीवन में आने वाले दर्द और संघर्षों को अधिक स्वीकार्यता के साथ देखने में मदद की। बाद में उन्होंने संन्यास लिया और अधिक जागरूक जीवन की दिशा में आगे बढ़ीं। इसी दौरान यात्रा, चित्रकला और अपनी रचनात्मकता से उनका दोबारा गहरा जुड़ाव हुआ।
आज नादब्रह्म और साइलेंट सिटिंग उनके नियमित जीवन का हिस्सा हैं और चित्रकला उनकी आंतरिक यात्रा की सहज अभिव्यक्ति बन चुकी है।
‘मैं दिव्यता से अलग नहीं हूं’
प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर मा देव अनंती ने कहा कि ध्यान के मौन में उन्होंने उस आंतरिक उपस्थिति को महसूस किया, जो कभी मनुष्य से बाहर थी ही नहीं। उनके अनुसार, ओशो ने किसी दूर बैठे ईश्वर की तलाश के बजाय व्यक्ति को अपने ही आंतरिक अस्तित्व की ओर जाने का मार्ग दिखाया।
उन्होंने कहा कि प्रेम, मौन और साक्षीभाव में दिव्यता का अनुभव होता है। जब खोजने वाला ही विलीन हो जाता है, तब जो शेष रह जाता है, वही आंतरिक उपस्थिति है।
‘नियो संन्यास अधिक जागरूकता और उत्सव का निमंत्रण’
मा धर्म ज्योति ने कहा कि नियो संन्यास की यात्रा अधिक जागरूकता, स्वतंत्रता और उत्सव के साथ जीवन जीने का निमंत्रण देती है। जब ध्यान जीवन का हिस्सा बन जाता है, तो रचनात्मकता स्वाभाविक रूप से भीतर से प्रवाहित होने लगती है।
वहीं, स्वामी चैतन्य कीर्ति ने कहा कि कला और ध्यान उस स्थान पर मिलते हैं, जहां शब्द मौन हो जाते हैं। ‘The Divine Within’ इसी आंतरिक यात्रा की अभिव्यक्ति है, जिसमें रचनात्मकता स्वयं के अस्तित्व को अनुभव करने का माध्यम बनती है।
नियो संन्यास सेलिब्रेशन में विभिन्न गतिविधियां
तीन दिवसीय ओशो नियो संन्यास सेलिब्रेशन में ध्यान, उत्सव और आंतरिक रूपांतरण की दृष्टि पर केंद्रित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में ‘The Divine Within’ प्रदर्शनी आंतरिक खोज को दृश्य अनुभव में बदलने का प्रयास करती है।
प्रदर्शनी के माध्यम से दर्शकों को बाहरी सतह से आगे देखने, कुछ क्षण ठहरने और ध्यान तथा रचनात्मकता के बीच संबंध को महसूस करने का अवसर दिया जा रहा है।
ओशो धाम दिल्ली
ओशो धाम दिल्ली एक ध्यान केंद्र है, जहां ओशो की ध्यान और जागरूकता की दृष्टि से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। केंद्र की ओर से वर्षभर विभिन्न ध्यान कार्यक्रम, शिविर, कार्यशालाएं और रिट्रीट आयोजित किए जाते हैं।

Stay Updated with Dainik India 24×7!
Follow us for real-time updates:




