Agniveers Protest: विरोध के बीच MHA का ऐलान- अग्निवीरों को 10% आरक्षण देंगे, जानिए कैसे और कहां मिलेगा फायदा
राजनाथ सिंह ने कहा- अग्निवीर' केवल सशस्त्र बलों में नए रंगरूटों को लाने का नाम नहीं, उन्हें भी वही क्वालिटी वाली ट्रेनिंग दी जाएगी, जो आज सेना के जवानों को मिल रही है। ट्रेनिंग का समय कम हो सकता है, लेकिन क्वालिटी से समझौता नहीं करेंगे।

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Agniveer Recruitment: अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) को लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार सहित देश के 13 राज्यों में युवाओं का हिंसक प्रदर्शन जारी है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र बलों और असम राइफल्स की भर्ती में अग्निवीरों को 10% आरक्षण देने का फैसला लिया है। इससे पहले मध्य प्रदेश समेत कुछ राज्यों की सरकारें अपने यहां पुलिस भर्ती में अग्निवीरों को वरीयता देने का ऐलान कर चुकी हैं। केंद्र सरकार ने भी पहली भर्ती में अग्निवीरों की अधिकतम आयु सीमा 21 से बढ़ाकर 23 साल कर दी है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से ट्वीट में कहा गया है कि केंद्रीय सशस्त्र बलों (CAPFs) और असम राइफल्स में अग्निवीरों को 10% आरक्षण मिलेगा। इसके अलावा उन्हें अधिकतम आयु सीमा में 3 साल की छूट दी प्रदान की जाएगी। अग्निवीरों के पहले बैच के लिए यह आयु में छूट की सीमा 5 साल रखी जाएगी। Read More: सेना में 4 साल के लिए अग्निवीरों की भर्ती, जानिए सैलरी और शर्तें
किसान कानून की तरह वापस होगी अग्निपथ
भारत की तीनों सेनाओं में भर्ती की नई स्कीम अग्निपथ योजना को लेकर विपक्ष भी मोदी सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस सहित बिहार की कई पार्टियां इसके विरोध में आ गई हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को कृषि कानून वापस लेना पड़ा, उसी तरह उन्हें युवाओं की मांग माननी होगी और अग्निपथ रक्षा भर्ती योजना को वापस लेना होगा।
जवानों का मनोबल गिरना नहीं चाहिए
उधर, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) ने इस योजना को एक क्रांतिकारी पहल बताया है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर कुछ पॉलिटिकल पार्टियां भ्रम फैला रही हैं। सरकार ने अग्निपथ योजना को पूर्व सैनिकों सहित व्यापक विचार-विमर्श और सुझाव के बाद शुरू किया है। रक्षा मंत्री ने आगे कहा, “क्या हमें देश के जवानों का मनोबल गिराना चाहिए? यह न्यायसंगत नहीं है। ‘अग्निवीर’ केवल सशस्त्र बलों में नए रंगरूटों को लाने का नाम नहीं है, उन्हें भी वही क्वालिटी वाली ट्रेनिंग दी जाएगी, जो आज सेना के जवानों को मिल रही है। ट्रेनिंग का समय कम हो सकता है, लेकिन क्वालिटी से समझौता नहीं किया जाएगा।





