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नाटक ‘लव एंड लाइज़ (स्टक)’ ने आधुनिक रिश्तों के सच और धोखे को दिया सशक्त मंच

श्री राम सेंटर में मंचित अंतिम प्रस्तुति ने आधुनिक रिश्तों, ईमानदारी और समझौतों पर गहन सवाल खड़े किए

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राजधानी दिल्ली में पिछले छह दिनों से चल रहा पन्ना भरत राम थिएटर फेस्टिवल 2025 अपने समापन के साथ यादगार बन गया। मंडी हाउस स्थित श्री राम सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स (SRCPA) में आयोजित इस प्रतिष्ठित थिएटर फेस्टिवल में दर्शकों को क्लासिक संस्कृत नाटकों से लेकर समकालीन सामाजिक विषयों पर आधारित नाटकों का समृद्ध अनुभव मिला।

फेस्टिवल के अंतिम दिन मनीष वर्मा द्वारा लिखित एवं निर्देशित ‘लव एंड लाइज़ (स्टक)’ का प्रभावशाली मंचन किया गया, जिसने आधुनिक रिश्तों में ईमानदारी, धोखे, भावनात्मक संघर्ष और समझौते जैसे संवेदनशील विषयों को गहराई से उकेरा।

हिमालय की पृष्ठभूमि में रिश्तों की मनोवैज्ञानिक पड़ताल

यह साइकोलॉजिकल कॉमेडी ड्रामा हिमालय की ट्रेकिंग पर निकले दो विवाहित जोड़ों—विक्रम-लीला और पार्थ-आरोही—के इर्द-गिर्द घूमता है। स्थानीय गाइड देवराज और सुनीता उन्हें पहाड़ों में मार्गदर्शन देते हैं। एक बर्फीले तूफान में सभी के फंस जाने के बाद, कहानी नया मोड़ लेती है, जहां दबे हुए राज़, झूठ और अधूरी सच्चाइयां सामने आने लगती हैं।

लीला द्वारा पार्थ के कथित धोखे का खुलासा, आरोही के प्रति उसकी निष्ठा पर सवाल खड़े करता है। इसके बाद रिश्तों की परतें खुलती जाती हैं और दर्शक भावनात्मक तनाव के साथ-साथ भीतर के द्वंद्व का साक्षी बनते हैं। जैसे-जैसे सच और झूठ की रेखाएं धुंधली होती जाती हैं, नाटक यह सवाल उठाता है कि
क्या रिश्तों में पूर्ण ईमानदारी संभव है या उन्हें बचाने के लिए कुछ झूठ ज़रूरी हो जाते हैं?

देवराज-सुनीता का रिश्ता: समझौते की कड़वी सच्चाई

देवराज और सुनीता का रिश्ता नाटक में एक और गहराई जोड़ता है। सुनीता, देवराज के अफेयर के बारे में जानने के बावजूद उसके साथ बनी रहती है, जो यह दर्शाता है कि प्यार में लोग कई बार समझौते और चुप्पी को भी सहारा बना लेते हैं। यह पक्ष दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है कि रिश्तों में सहनशीलता और आत्म-सम्मान के बीच संतुलन कैसे साधा जाए।

दर्शकों का मिला भरपूर समर्थन

एसआरसीपीए के अध्यक्ष हेमंत भरत राम ने कहा,
“हमेशा हमारा प्रयास रहा है कि दर्शकों के लिए मनोरंजक और संदेशपरक नाटकों का चयन किया जाए। पन्ना भरत राम थिएटर फेस्टिवल में हमने अवार्ड-विजेता और अलग सोच वाले नाटकों का गुलदस्ता पेश किया। दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया हमारे लिए प्रेरणादायक है।”

वहीं रिपर्टरी चीफ सिंकदर कुमार ने कहा,
“इस फेस्टिवल में चुने गए नाटकों की विषयवस्तु, अभिनय, लाइटिंग, संगीत, वेशभूषा और मंच प्रस्तुति सभी स्तरों पर बेहद सशक्त रही। दर्शकों की तालियों और उत्साह ने हमें भविष्य में और बेहतर प्रस्तुतियां लाने के लिए प्रेरित किया है।”

थिएटर प्रेमियों के लिए यादगार उत्सव

पन्ना भरत राम थिएटर फेस्टिवल 2025 न सिर्फ मनोरंजन बल्कि समाज, रिश्तों और मानवीय भावनाओं पर गहन संवाद का मंच बनकर उभरा। अंतिम प्रस्तुति ‘लव एंड लाइज़ (स्टक)’ ने यह साबित किया कि समकालीन थिएटर आज भी दर्शकों को सोचने, महसूस करने और आत्ममंथन करने की ताकत रखता है।

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