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भगवान विष्णु का स्वरुप मानी जाने वाली शिलाओं से बनेंगी श्री राम और माता सीता की मूर्ति

नेपाल (Nepal) से जो शालिग्राम की 2 शिलाएं लाई जा रही है वो करीब-करीब 6 करोड़ साल पुरानी बताई जा रही है। इन दो विशाल शालिग्राम शिलाओं का वज़न 26 और 14 टन बताया जा रहा है।

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उत्तर प्रदेश की प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर निर्माण का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। भव्य राम मंदिर में भगवान राम और सीता माता की मूर्ति के लिए विशेष पत्थर का प्रयोग किया जाएगा। नेपाल की गंडकी नदी से निकाली गई विशाल विशेष शालिग्राम शिलाएं भगवान श्रीराम और माता सीता की मूर्ति को बनाने के लिए उपयोग में लाई जाएगी। ये पवित्र शिलाएं 2 फरवरी तक उत्तर प्रदेश (UP) की अयोध्या में पहुंचेंगी।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने जानकारी देते हुए कहा कि विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल शिलाओं के साथ 2 फरवरी को अयोध्या पहुंचेगा। हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सीता माता नेपाल के राजा जनक की बेटी थीं और उनका विवाह अयोध्या के मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम से हुआ था।
राम नगरी अयोध्या में भव्य राम मंदिर का कार्य जोरशोर से चल रहा है, अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2024 में राम मंदिर का गर्भ गृह बनकर तैयार हो जाएगा।
नेपाल (Nepal) से जो शालिग्राम की 2 शिलाएं लाई जा रही है वो करीब-करीब 6 करोड़ साल पुरानी बताई जा रही है। इन दो विशाल शालिग्राम शिलाओं का वज़न 26 और 14 टन बताया जा रहा है। इनकी तलाश में एक टीम महीनों से जुटी थी। वहीं इन शिलाओं के धार्मिक महत्व की बात करें तो इनको भगवान विष्णु का स्वरुप माना जाता है।
मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम और माता सीता की मूर्ति का निर्माण इन्हीं 2 शालिग्राम शिलाओं से होगा, ये बात तय हो गई है। इन शिलाओं से मूर्ति बनाने के लिए मूर्तिकारों का चयन किया जाएगा। मूर्तिकार सबसे पहले अपनी एक ड्राइंग और सैंपल बनाकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को देंगे। इसके बाद जिसकी ड्राइंग और सैंपल सबसे अच्छा होगा, उसे मूर्ति बनाने का कार्य सौंपा जाएगा।
-ओम कुमार
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