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Book Launch: 20 साल बाद भी सक्रिय है ‘Wife Swapping’ का नेटवर्क

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में पूर्व CJI के. जी. बालकृष्णन ने किया ग्रामीण भारत की चुप्पी तोड़ती विनीता यादव की खोजी किताब का विमोचन

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-जगजीत सिंह

ग्रामीण भारत में पिछले दो दशकों से सक्रिय ‘Wife Swapping’ जैसे अत्यंत संवेदनशील और चौंकाने वाले सामाजिक नेटवर्क पर आधारित वरिष्ठ पत्रकार विनीता यादव की खोजी पुस्तक “Wife Swapping in Rural India” का विमोचन नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में किया गया। पुस्तक का विमोचन देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के. जी. बालकृष्णन द्वारा किया गया।

पुस्तक विमोचन के अवसर पर विनीता यादव ने बताया कि इस प्रथा की जानकारी उन्हें लगभग 20 वर्ष पहले जमीनी रिपोर्टिंग के दौरान मिली थी। उस समय यह प्रथा सीमित क्षेत्रों तक सिमटी हुई थी, लेकिन आज यह नेटवर्क कहीं अधिक संगठित, तकनीकी रूप से सक्रिय और सामाजिक रूप से छिपा हुआ बन चुका है।

विनीता यादव के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में पत्नी अदला-बदली से जुड़े लोग आज भी सक्रिय हैं और WhatsApp ग्रुप्स, Facebook तथा निजी डिजिटल नेटवर्क्स के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। आधुनिक तकनीक ने इस नेटवर्क को और अधिक मजबूत बना दिया है, जबकि समाज ने इस मुद्दे पर अब भी चुप्पी साध रखी है

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पुस्तक किसी सनसनी या अफ़वाह पर आधारित नहीं है, बल्कि लंबे समय तक की गई खोजी पत्रकारिता, प्रत्यक्ष अनुभव और जमीनी तथ्यों पर आधारित है। किताब यह गंभीर सवाल उठाती है कि जब समाज परंपरा और संस्कृति की दुहाई देता है, तब ऐसी अमानवीय प्रथाएं चुपचाप कैसे फलती-फूलती रहती हैं।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के. जी. बालकृष्णन ने पुस्तक की भूमिका लिखते हुए और विमोचन के दौरान कहा कि यह किताब भारतीय समाज के उस चेहरे को उजागर करती है, जिस पर अक्सर जानबूझकर पर्दा डाल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी पुस्तकें केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि समझने, सोचने और सवाल उठाने के लिए होती हैं।

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पाठक, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और शोधकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरा कि ग्रामीण भारत को आदर्श और पवित्र मानने की धारणा के पीछे कई अनकही और अनदेखी सच्चाइयाँ भी मौजूद हैं।

“Wife Swapping in Rural India” केवल एक किताब नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज की उस गहरी चुप्पी के खिलाफ एक सशक्त दस्तावेज़ है, जिसे तोड़ना आज भी असहज और चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

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