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Uttarakhand: जोशीमठ में दरारें और जमीन घंसना निरंतर जारी
उत्तराखंड के धार्मिक शहर जोशीमठ में घरों में दरारों और जमीन धंसने की घटनाओं को देखते हुए इसको धंसता क्षेत्र घोषित किया गया है

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उत्तराखंड का प्रसिद्ध शहर जोशीमठ एक भयंकर आपदा से गुजर रहा है। जोशीमठ में पिछले कई दिनों से वंहा के घरों में बड़ी-बड़ी दरारें आ रही है और कई जगह ज़मीन धंसने की तस्वीरें भी सामने आई है। जोशीमठ में दरारें और जमीन धंसने को लेकर वंहा का प्रशासन गंभीर नज़र आ रहा है। जोशीमठ का सैटेलाइट सर्वेक्षण होने के बाद 600 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करवाया गया है।

खबरों के मुताबिक़ जोशीमठ के 600 घरों को खाली कराया गया है और लगभग 4000 के आसपास लोगों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया है। जोशीमठ में हालात को देखते हुए वंहा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उत्तराखंड सरकार की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक प्रथम चरण में कुल 678 भवन और 2 होटल को चिन्हित किया गया है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आवास में नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीएमए) के अधिकारियों एवं सदस्यों ने एक मीटिंग कर मुख्यमंत्री को जोशीमठ भूधंसाव से उत्पन्न स्थिति के बाद राहत एवं बचाव कार्यों के संबंध में जानकारी दी और विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री धामी ने जानकारी देते कहा कि “जोशीमठ क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थिति एवं भू धंसाव के कारणों की जांच तथा आपदा राहत में केंद्रीय मदद का आश्वासन दिया। एनडीएमए के अधिकारियों से राज्य के अन्य शहरों की धारण क्षमता के आकलन हेतु आवश्यक वैज्ञानिक शोध एवं परीक्षण में सहयोग की अपेक्षा की। हमारी सरकार युद्ध स्तर पर आपदा पीड़ितों की मदद करने के साथ ही पीड़ित परिवारों को हर संभव आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूर्ण समर्पण भाव के साथ कार्य कर रही है”।

उत्तराखंड के चमोली जिले के जिला अधिकारी (डीएम) हिमांशु खुराना ने जानकारी देते हुए बताया कि हालात की गंभीरता को देखते हुए इस धार्मिक शहर की सभी खतरनाक इमारतों पर लाल रंग से ‘X’ निशान लगाया गया जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से इन इमारतों को रहने के लिहाज से असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद इसके निवासियों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जा रहा है।
जानकारी के लिए बता दें कि उत्तराखंड के धार्मिक शहर जोशीमठ में घरों में दरारों और जमीन धंसने की घटनाओं को देखते हुए इसको धंसता क्षेत्र घोषित किया गया है। वंही जोशीमठ का महत्व इसलिए भी है क्योंकि हिंदुओं के पवित्र और लोकप्रिय तीर्थस्थल केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम के साथ-साथ टूरिस्टों के लिए जन्नत कहे जाने वाली जगह ओली का प्रवेशद्वार है।
जानकारी के लिए बता दें कि जोशीमठ आपदा को लेकर दिल्ली में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हाई लेवल मीटिंग की गई।
-ओम कुमार





